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बच्चों में बढ़ती हुई बीमारी की वजह?

बच्चों में बढ़ती हुई बीमारी की वजह?

बच्चों में बढ़ती हुई बीमारी की वजह?

मैं स्पष्ट रूप से कहता हूँ - माताओं को हमेशा अपने बच्चों के लिए चिंता होती हैं। जिस समय और युग में हम रहते हैं उसे देखते हुए हम उन्हें दोष नहीं दे सकते क्योंकि आजकल के बच्चों को उनके माता-पिता ने बचपन में जिन खतरों से सामना उनकी तुलना जादा खतरों से सामना करना पड़ रहा है वे पहले की तुलना में अधिक बीमार पड़ रहे है ।

यह वास्तव में, दुर्भाग्य से एक चिंताजनक स्थिति बनते जा रही है। लेकिन क्या इस पीढ़ी के बच्चों को हमारी पीढ़ी के तुलना में अधिक खतरों का सामना करना पड़ रहा है ? उन पर इस प्रतिकूल प्रभाव का मूल कारण क्या है? 

खैर, यह अलग अलग बाहरी और आंतरिक प्रभाव की वजह से है। इन कारकों को हम विश्लेषित करते है ताकि अपने बच्चों की हम अधिक कुशलता से रक्षा कर सकेंगे।

  • विकसित रोगाणु: हालांकि विज्ञान कई गुना विकसित हुआ है, तो रोगाणु भी विकसित हुआ है। विज्ञान मौजूदा बीमारियों के नए इलाज खोज रहा है तभी कुछ कीटाणुओं ने अपनी प्रतिकार शक्ति इतनी बढ़ा ली है की इन दवाओं का उनपर कोई असर नही होता है। इस प्रकार, न केवल कीटाणुओं हमारे बच्चों को बीमार कर रहे हैं, बल्कि वे उन्हें दवा प्रतिरोधी बना रहे हैं, जो इस तरह के रोगाणु, और संक्रमण से जूझना और भी मुश्किल बनाते है - जिससे बच्चे लंबी अवधि के लिए बीमार बने रहते है।

 

  • कम उन्मुक्ति: दुर्भाग्य से, बच्चों का विकास का विकास पूरी तरह नही हुआ रहता हैं, उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली अब भी विकसित होने के स्थिति में होती है, इसलिए वे इन कीटाणुओं का उसी गति से लड़ने में सक्षम नहीं होते जितने गति से ये कीटाणु बढते हैं। बच्चे की प्रतिरक्षा कोशिका अक्सर इन मजबूत कीटाणुओं की पहचान और प्रतिकार नहीं कर सकते और बच्चे के शरीर खाइस तरह के रोगों और संक्रमण से लढने के लिए रक्षा प्रणाली का निर्माण करने में असमर्थ होते है। नतीजतन, हमारे बच्चे इन कीटाणुओं और बीमारियों की चपेट में आते हैं।

 

  • बहुत ज्यादा दवा: कीटाणुओं के वृद्धि के साथ, दवा में भी अच्छी तरह से वृद्धि होगी। माता-पिता गलत समझते है की गोलियाँ लेने से इन सभी संक्रमणों और बीमारियों से मुक्ति पाई जा सकती हैं। जबकि दवा जरूरी है, जुनूनी माता-पिता उन्हें अति प्रयोग करते है, जैसे ही बच्चे को खांसी या छींक होती है , कई बच्चों को एंटीबायोटिक दवा दी जाती है जो खतरे से खाली नहीं होती हैं। इससे उसके ठीक होने में उन्मुक्ति के बजाय बाहरी सहायता पर निर्भर रहना होता है। 
    संवेदनशील और जिम्मेदार मां के रूप में, हम यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि दवा पर निर्भर होने के बजाय, बच्चो में बेहतर प्रतिरोधक क्षमता और शक्ति विकसित करने के लिए उन्हें अच्छी तरह से संतुलित आहार दें। हम सभी जानते हैं, रोकथाम इलाज से बेहतर है!

 

  • कीटाणु , प्रदूषण और पर्यावरण में एलर्जी की वृद्धि : 
    हम अक्सर नए वायरस और रोगों के प्रकार के बारे में सुनते है, जो कुछ समय पहले अस्तित्व में नहीं थें, और अचानक एक बड़ा खतरा बन गए है; इनमे स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू, इबोला, आदि शामिल है। इसका कारण यह है कि आजका वावार्ण कीटाणु की वृद्धि के लिए पोषक है। इसके अलावा, प्रदूषण और एलर्जी के माहौल में शापग्रस्त उपद्रव है, जो आगे चल के बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता में बाधा बन गए हैं

 

  • स्वच्छता की आदतें और दिनचर्या ही काफी नहीं: माता शायद ही कभी यह सुनिश्चित करती है कि बच्चे उचित समय पर अच्छी तरह से उनके हाथ धोते हैं और वह भी उचित जीवाणुरोधी साबुन से। ऐसी कितने माताएं है जो बच्चों को रोगाणु संरक्षण साबुन के साथ स्नान देती है? जवाब के सारहीन है क्यों की पर्यावरण परिदृश्य तेजी से खराब होते जा रहा है, और इन विकसित होने वाली बीमारियों से लड़ने के लिए अधिक से अधिक और अधिक अच्छे संरक्षण की जरूरत है। साबुन से मात्र हाथ धोने से कुछ फरक नही पड़ने वाला ; विशेष रूप से, जब हम जानते है की बच्चों को इनसे कोई सुरक्षा नहीं होती हैं। 

समय बदलने के साथ हमें अधिक व्यापक स्वच्छता एवं रोगाणु संरक्षण शासन अपनाना होगा जिसमे प्राथमिक स्वच्छ आदतें जैसे बच्चों के कपड़े , स्कूल बैग, खिलौने, और अन्य बच्चों के उत्पादों की सफाई करने से शुरू करने की जरूरत है। शुक्र है, डेटॉल की नई रेंज - डेटॉल गोल्ड साबुन और तरल हैण्डवाश अन्य कीटाणु संरक्षण साबुन और हैण्डवाश से 100% बेहतर सुरक्षा देने का वादा करते है ।